Wednesday, October 2, 2019

Google ही कर लेती हु

गट्टे के पुलाव बनाने का आज खयाल आया
रेसेपी कन्फर्म करने के लिए फ़ोन उठाया
फिर सोचा इतनी सी बात के लिए दादीजी को क्या फ़ोन करू
google  ही कर लेती हु

भोजन बनाते बनते रामानंद पंडित की वार्ता आधी अधूरी याद आयी
सोचा फ़ोन करके बाबूजी से  पूरी सुन लेती हु
फिर सोचा इतनी सी बात के लिए दादाजी  को क्या परेशान  करू
google  ही कर लेती हु

बैंक अकाउंट के बारे में एक query आयी
सोचा पापा को फ़ोन करती हु
फिर सोचा इतनी सी बात के लिए पापा  को क्या डिस्टर्ब   करू
google  ही कर लेती हु

मुंबई बारिश से बेहाल है व्हाट्सप्प पे पड़ा
बहिन के चिंता हुई ,फ़ोन हाथ में पकड़ा 
फिर सोचा इतनी सी बात के लिए नेहा  को क्या फ़ोन  करू
google  ही कर लेती हु

रात में दादीजी का मैसेज आया
बहुत दिनों से तेरा क्यों  फ़ोन नहीं आया
क्या तुझे  हमारा ख्याल नै आया
फटकार उन्होंने मुझे लगाया

अब क्या कहती मैं
की रात दिन आप सबके बारे में सोचती मैं
पर व्यस्त  इतनी रहती मैं 
की आजकल बस google  ही कर लेती मैं

10th birthday

एक दशक पहले की है यह बात
१४ दिसम्बर की थी वोह सर्द रात
नम आँखों से देखि थी मैंने उसकी पहली झलक
मेरे हाथो में थी मेरी पलक

मिली उस दिन थी मुझे पहचान नई
विस्मित मन में भर गयी भावनाए कई

दर्द सहना उस दिन था मैंने जाना
डर को इतने करीब से पहचाना
उस नन्हें से तोते में बस गयी मेरी जान
वोह छोटी सी सूरत बन गयी मेरी पहचान

कितना अनूठा है ममता का यह नाता उस दिन से मैंने जाना
ऐसा निस्वार्थ प्रेम और किसि रिश्ते में कहा आ पाता

मन को उस दिन से हर पल रहने लगा यह बोध
मुझ पर निर्भित है वोह अबोध
मुझे ही बनना है उसका रक्षक
मैं ही होंगी उसकी पथप्रदर्शक

मुझे ही वोह देखेगी मुझ से ही सीखेगी
मेरी छाया मुझ जैसी ही बोलेगी

काँप गयी सोच के, की मैं होंगी उसकी उदहारण
करने लगी खुद में बदलाव मैं उस कारण
अच्छि माँ बन पायी या नहीं, जानती नहीं मैं
पर पहले से बेहतर इंसान जरूर बन गयी मैं उस परी के कारण

पार्थ की गुहार

भेजा मुझे धरा पे देके अपने जैसा रूप सलोना
कहा हे पार्थ तुम बनोगे सबका मनपसंद खिलौना

पर यहाँ तो मम्मी पे सलेसफोर्स की धुन
पापा मोबाइल में गुम
आय पैड ने कर रखा जीजी को बिजी
सच कहता हु लाइफ नहीं है यहाँ इजी

मुस्कुराकर में सबको लुभाना चाहता
पर फेसबुक व्हाट्सप्प से नहीं जीत पाता
दादी नानी की लोरी भीयहाँ कोई नहीं सुनाता
यु टूब की लुलूबाईएस सुन मैं सो जाता

टेक्नोलॉजी में क्रेजी यह संसार
ओ कृष्ण तुम्ही सुन लो मेरी गुहार
करो न कोई जादू टोना
की फिर बनु मैं सबका मनपसंद खिलौना

बेटी की बिदाई -- माँ के मन की उधेडबुन

कर्त्तव्य यह बड़ा कैसे निभाऊ  मैं
कन्या का अपने दान कैसे कर आऊ मैं

नित नए प्यंजन  जिसके लिए रोज बनाऊ मैं
सब्जी कम देख, आज आचार रोटी खाने का मन है मेरा
 ये कहना  कैसे उसे  सिखलाऊ मैं
कर्त्तव्य यह बड़ा कैसे निभाऊ  मैं

अवल आने का सबक  जिसको  हमेशा सिखला ऊ मैं 
 कभी पति कभी बच्चो  के लिए कदम पीछे लेने में नहीं कोई बुराई
कैसे उसे अब यह  बतलाऊ  में
कन्या का  अपने दान कैसे कर आऊ मैं

सालो तक घंटे जिसकी बाते सुनने मे  बिताऊ मैं
फ़ोन उसे करने से पहले सही समय देखना होगा
यह सोच सिहर जाऊ  में
कर्त्तव्य यह बड़ा कैसे निभाऊ  मैं

आत्मनिर्भर बीटिया है मेरी, नहीं करने होंगे उसे समझौते
यह खुद को समझाऊ मैं
फिर भी न जाने क्यों , मंदिरो में मन्नते  मांगती जाऊ में
कन्या का अपने दान कैसे कर आऊ  मैं 

सुबक सुबक के माँ मेरी थी  रोती
हर किसी की बिदाई में माँ दुखी तू क्यों होती
यह कह ममता का उसके मजाक  उड़ाया था कभी
अब यह सोच पछताओ मैं
भावना को उसकी अब समझ पाऊ  मैं

कर्त्तव्य यह बड़ा कैसे निभाऊ  मैं
कन्या का अपने दान कैसे कर आऊ  मैं