Monday, November 5, 2012

a thought


माता पिता के त्याग की गाथा गाता जहान
जिजामाता ने बनाया शिवाजी को महान
श्रवण जैसा बेटा चाहे हर पिता
पर प्रह्लाद की बोलो क्या थी खता 

पुराणों में भी है उल्लेक
बच्चो ने  निभाए कर्त्तव्य अनेक  
दो वचनों के लिए वन गए रघुराई
भीषण प्रतिज्ञा देवरत ने उठाई
  
त्याग दोनों ने किये महान
पर राम से बड़ी रघुकुल की शान
और महाभारत के संग्राम से कोई नहीं है अन्जान

क्या है आखिर वोह तर्क
क्यों दोनों के अंजाम में है फर्क
दोनों ने ही तो मानी थी पिता की बात
फिर क्यों हुआ एक सही और एक गलत

धर्म से दशरथ थे विवश
और शांतनु थे काम के वश
नियत का था फर्क
येही है पुराणों का अर्क

मेरी तो  इतनी सी  है अर्ज
सोचो समझो फिर निभाओ फर्ज
गलत का मत लो पक्ष
फिर चाहे माता पिता  ही क्यों हो विपक्ष

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