माता
पिता
के
त्याग
की
गाथा गाता
जहान
जिजामाता ने
बनाया
शिवाजी
को
महान
श्रवण
जैसा
बेटा
चाहे
हर पिता
पर प्रह्लाद की बोलो क्या थी खता
पुराणों
में
भी
है उल्लेक
बच्चो
ने
निभाए
कर्त्तव्य
अनेक
दो
वचनों
के
लिए
वन
गए
रघुराई
भीषण प्रतिज्ञा देवरत ने
उठाई
त्याग दोनों ने किये महान
पर
राम
से
बड़ी
रघुकुल
की
शान
और
महाभारत के संग्राम
से कोई नहीं है अन्जान
क्या है आखिर वोह तर्क
क्यों दोनों के अंजाम में है फर्क
दोनों ने ही तो मानी थी पिता की बात
फिर क्यों हुआ एक सही और एक गलत
धर्म से दशरथ थे विवश
और शांतनु थे काम के वश
नियत का था फर्क
येही है पुराणों का अर्क
मेरी तो
इतनी सी है अर्ज
सोचो
समझो
फिर
निभाओ
फर्ज
गलत
का
मत
लो
पक्ष
फिर
चाहे
माता पिता
ही
क्यों
न
हो
विपक्ष
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