Monday, November 5, 2012

meri rachna


समाज पर पड़ रही है भारी
आज की उच्च शिक्षित नारी
आचल में दूध और आख में पानी
अब नहीं रही उसकी येही कहानी

परमेश्वर नहीं है अब भरतार
पर है प्यारा साझीदार
बच्चे  है उसकी जान
 पर नहीं उसकी केवल पहचान

अब नहीं सहती वोह
अब नहीं चुप रहती वोह
हर काम  में है उसकी भागीदारी
घर को जोड़े रखना
 अब नहीं सिर्फ उसकी जिम्मेदारी

घर  का आँगन ही
अब नहीं उसका जहान
खुले आसमान में भी
भरनी है उसे उडान

ज्ञान की पकडे  डोर
चली वोह प्रगति की ओर
थाम घर  बाहर दोनों नावो की पतवार
आगे बड़ रही  है आज की  सुशिक्षित  नार  

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