डरती जिससे हर भौजाई
घडी है वोह आई
पधार रही है ननद
संग लिए नंदोई
घर पे मेरे होगा उसका राज
मीन ,मेख निकलेगे अब हर काज
जीजी बाई कहते थकेगी नहीं मियाजी की जुबान
अपने ही घर में कहलौंगी में मेहमान
कितने दिन से कर रही हु तयारी
चमक रही है घर की हर गलियारी
बेल बेल के दुःख गए है हाथ
बड़ी पापड़ बांधने जो है साथ
कमर ली है मैंने क़स
नहीं सुनने है ताने बस
मन में है आस
ननद बाई जाए
इस बार हस हस
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