देखा जो आज ,पहला सफ़ेद बाल
मन में आया येही एक ख्याल
क्या सच मुच बीत गए है इतने साल
मन में आया येही एक ख्याल
क्या सच मुच बीत गए है इतने साल
फिर क्यों लगती है मुझे
कल की है जैसे यह बात
लिया था मैंने अपना पहला कदम
पापा का थामके हात
वोह स्कूल कॉलेज की भागा दौड़ी
वोह सखियों के संग हसी ठिठोली
क्या दास्ता है सब पिछले जनम की
बाबुल की लेके दुआए
चली थी पिया के साथ
आशओं और उमीदो को पलकों में सजाए
लिए थे फेरे साथ
चली थी पिया के साथ
आशओं और उमीदो को पलकों में सजाए
लिए थे फेरे साथ
मन में हुई एक कम्पन
जीवन का अपने जब किया मंथन
वक़्त कितना कर दिया जाया
छोटी बातो पे रोके मैंने क्या पाया
आज खोली जब जीवन की
बही
बनाई फेहरिस्त चीजो की जो की नहीं
बात मन में है यह आई
जीयो अब ऐसे पछतावा रहे न कोई
बनाई फेहरिस्त चीजो की जो की नहीं
बात मन में है यह आई
जीयो अब ऐसे पछतावा रहे न कोई
आज फिर है यह ठानी
करू सार्थक कहावत वोह पुरानी
करू कुछ ऐसा की
जाऊ जब में यह जाहा छोडके
मुस्कराओ मैं ; रोये लोग जग भरके
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